बाल उत्त्पीड़न की अंतःकथाएँ कहता यह उपन्यास उस बच्चे के बारे में आपको नए सिरे से सोचने के लिए बाध्य करता है , जिसके आप माता-पिता हैं अथवा अभिभावक
स्कूल बैंड
सन उन्नीस सौ इक्यावन में संतपुरिया बालिका विद्यापीठ, संतपुर के एन.सी.सी बैंड ने पहली बार दिल्ली की गणतंत्र दिवस की परेड में परफॉर्म किया था। इसके बाद साल-दर-साल उसका एक शानदार इतिहास बनता चला गया। किन्तु बासठ साल बाद, दौ हजार बारह में यह कहकर उसे परेड से बाहर कर दिया गया कि वह एक प्राइवेट स्कूल का बैंड है।
Swar Sarita –
डॉ. सैनी ने इस उपन्यास में हिंदी की हदबंदी को तोड़ते हुए भाषा को नये तेवर प्रदान किये हैं और संत दर्शन की प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया है।