सन उन्नीस सौ इक्यावन में संतपुरिया बालिका विद्यापीठ, संतपुर के एन.सी.सी बैंड ने पहली बार दिल्ली की गणतंत्र दिवस की परेड में परफॉर्म किया था। इसके बाद साल-दर-साल उसका एक शानदार इतिहास बनता चला गया। किन्तु बासठ साल बाद, दौ हजार बारह में यह कहकर उसे परेड से बाहर कर दिया गया कि वह एक प्राइवेट स्कूल का बैंड है।
यह दलील बैंड की इक्यावन कैडेटस के गले से नहीं उतरी। उनको लगा कि सरकार की यह नाइंसाफी ही नहीं, बल्कि ज्यादती भी है। उन्होंने सक्रिय सत्याग्रह करने का फैसला किया। फैसला किया कि संतपुर से सड़क पर परेड करता हुआ उनका बैंड दिल्ली तक जायेगा और इस तरह सरकार के गलत फैसले को रद्द करवाकर रहेगा।
अपने फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए इक्यावन कैडेट का बैंड दिल्ली के लिए निकल पड़ा। वे जैसै-जैसे आगे बढ़ती गयीं, उनको व्याप्क जन समर्थन व मीडिया कवरेज मिलता गया। उनके स्कूल की ओल्ड कैडेट्स, गाइडस, स्टुडेंट्स व ग्रामीण महिलाओं के उत्साहवर्धक जुड़ाव से यह परेड स्त्री-सशक्तिकरण की मुहिम में तब्दील होती चली गयी।
अनेक दिक्कतों, तकलीफों व मुसीबतों का सामना करते हुए बैंड ने सात दिन में एक सौ चालीस किमी का फासला तय कर लिया। पचास किमी आगे चलकर उनका इरादा हाइवे जाम करने का था। लेकिन, इसकी नौबत नहीं आयी और हुआ वही जो वे चाहती थीं।
आठवें दिन प्रधानमंत्री उनके कैम्प में आये। उन्होंने कहा कि आजाद भारत की आगे बढ़ती महिलाओं की नुमाइंदगी करने वाले इस बैंड को गणतंत्र दिवस की परेड से बाहर करने के बारे में सोचना भी पाप है।
उन्होंने मीडिया को बताया कि एक शिक्षा-माफिया के इशारे पर कुछ अफसरों ने बैंड को परेड से बाहर करने की साजिश रची थी। उन सबको सस्पेंड कर दिया गया है।
बासठवें गणतंत्र दिवस समारोह में स्कूल बैंड ने राजपथ पर परफॉर्म किया तो न्यूज चैनल्स ने बैंड को बढ़-चढ़कर स्पेस दिया। देश भर में लाइव टेलिकास्ट देखने वाली गांव-शहर की बालिकाओं व महिलाओं को अपनी ताकत का अहसास हुआ और उन्हें लगा कि वे, वह सब कर सकती हैं, जो करना चाहती हैं।
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