
R.D. Saini
धर्मपरायण स्व.माता-पिता ने अपनी भावना, आस्था एवं निष्ठा के अनुरूप 13 अप्रैल 1957 को पिलानी में जन्मे अपने पुत्र का नाम रामधारी रखा और उसे प्रेम, सत्य, करूणा व बन्धुत्व का पाठ पढ़ाया। उनके ये संस्कार डॉ. सैनी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व में साकार हुए हैं। इनको स्व.लक्ष्मणसिंह जी शेखावत (प्रतिष्ठित समाजसेवी) पद्मश्री राममगोपाल विजयवर्गीय (अंतरराष्ट्रीय चित्रकार) पद्मश्री कोमल कोठारी (अंतरराष्ट्रीय लोकसंस्कृति मर्मज्ञ) पद्मश्री विजयदान देथा (अंतरराष्ट्रीय कथाकार) जैसी विभूतियों
का मार्गदर्शन मिला।
बिरला एजुकेशन ट्रस्ट ,पिलानी के स्कूलों में ( 1975 तक ) रामधारी की स्कूली शिक्षा उनके भावी जीवन की मजबूत बुनियाद साबित हुईं, जहां उनकी प्रतिभा को पहचाना गया एवं तदनुरूप उसे संवारा गया। एक मेधावी विद्यार्थी के रूप में उन्होंने सभी कक्षाएँ प्रथम श्रेणी से पास करके गुरुजन का आशीर्वाद पाया व उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया।
उच्चशिक्षा के लिए रामधारी पिलानी से जयपुर आये जहां राजस्थान विश्वविद्यालय (1975-1980 ) से उन्होंने बी.ए, एम.ए और पीएच.डी की डिग्री ली और शैक्षणिक उत्कृष्टता को कायम रखते हुए सभी परीक्षाएं प्रथम श्रेणी से पास कीं।
उन्होंने 1980 में कॉलेज प्रवक्ता के रूप में अपना कॅरियर प्रारम्भ किया और लगभग डेढ़ दशक के बाद 1997 में चिड़ावा कालेज,चिड़ावा (झुंझुनूं ) के प्राचार्य बने। यहां से वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हुए और विभिन्न आयोजनों में भाग लेते रहे।
लगभग 18 वर्ष तक अध्यापन करने के पश्चात सन 2000 में राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक पद के लिए चयनित हुए। यहां 14 वर्ष के अपने कार्यकाल में हिंदी माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए विञान, मानविकी, कला, वाणिज्य, सामाजिक विञान एवं कला विषयों के 200 से अधिक सन्दर्भ ग्रंथों की रचना विषय-विशेषज्ञों से करवायी। आज ये ग्रंथ हिंदी प्रदेशों के सभी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में अनुशंसित हैं। उनके इस महत्वपूर्ण से हिंदी भाषी विधार्थियों को अंग्रेजी के
संदर्भ ग्रंथ पढ़ने की बाध्यता से मुक्ति मिली।
वे 13 वर्ष तक वैञानिक-तकनीकी शब्दावली आयोग (भारत सरकार) की रिवाल्विंग कमेटी के सदस्य रहे और उन्होंने सरकार की उच्च शिक्षा में माध्यम परिवर्तन की नीति के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
सन 2013 में वे राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य बनाये गये। आगे चलकर उन्हें आयोग के चेयरमैन के दायित्व का निर्वाह करने का अवसर मिला और उन्होंने अपनी सूझबूझ से आयोग को तदकालीन संकट से न सिर्फ बाहर निकाला बल्कि उसकी प्रतिष्ठा को बहाल किया था। वे 6 वर्ष तक आयोग की सेवा में रहे और अप्रैल 2019 में सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्ति हुए।
डॉ. सैनी हिंदी के जाने-माने साहित्यकार हैं। विद्यार्थी जीवन में ही उनकी रचनाएं देश की समस्त पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगी थी। उनकी दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। कथा शुरू होती है (कविता संग्रह) गुन रहा है गांव (कविता संग्रह) बच्चे की हथेली पर, प्रिय ओलिव, किताब व स्त्रीगंध उनके बहुचर्चित उपन्यास हैं। घनश्यामदास बिरला एक महत्वपूर्ण मोनोग्राफ है। किताब का देश-विदेश की अनेक भाषाओं में अनुवाद का काम चल रहा है। उनके उपन्यास प्रिय ओलिव को मीरा अवार्ड ( 2020-2021) से नवाजा गया है जो राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार है। स्कूल बैंड उनका प्रकाशनाधीन उपन्यास है।
एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद के रूप में वे राजस्थान के राजस्थान विश्वविद्यालय (दो बार) पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय (दो बार) कोटा विश्वविद्यालय, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, कोटा तकनीकी विश्वविद्यालय, हरिदेव जोशी पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय, महाराजा सूरजमल विश्वविद्यालय तथा मत्स्य विश्वविद्यालय के लिए गठित की गयीं कुलपतियों की खोजबीन समितियों के सदस्य रहे हैं। अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय एवं गोविंद गुरु विश्वविद्यालय की स्टाफ सलेक्शन कमेटियों के सदस्य भी रह चुके हैं।
डॉ.सैनी ने पद्मश्री कोमल कठारी के निर्देशन में वर्षों (1984-2000) तक राजस्थान की लोक संस्कृति का अध्ययन किया था। इसीलिए महेन्द्र कुमार मोहता फाउंडेशन ने उनको सादुलपुर में मोहता इन्स्टीट्यूट ऑफ फोकलोर रिसर्च का निदेशक नियुक्त किया था जहां लोक संस्कृति से सम्बन्धित अनेक शोध परियोजनाओं का क्रियान्वयन उनके निर्देशन में सम्भव हुआ।
सन 2009 में डॉ.सैनी ने जयपुर में राजस्थान पुस्तक पर्व का सूत्रपात किया था जिसने भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों को अखिल भारतीय मंच प्रदान किया। पुस्तक-संस्कृति को बढ़ावा देने वाले इस बड़े आयोजन ने लाखों पुस्तक प्रेमियों व विद्यार्थियों तक पहुंच बनायी थी। एक विद्वान, लेखक, शिक्षाविद, प्रशासक एवं आयोजक के साथ-साथ वे कुशल वक्ता भी हैं।
फिलहाल वे अपने उपन्यास ‘एक टॉपर की डायरी’ पर काम कर रहे हैं।
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8/229, Malviya Nagar, Jaipur (Raj.) 302017
rdsaini1957@gmail.com
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