Books

बच्चे की हथेली पर

बाल उत्त्पीड़न की अंतःकथाएँ कहता यह उपन्यास उस बच्चे के बारे में आपको नए सिरे से सोचने के लिए बाध्य करता है , जिसके आप माता-पिता हैं अथवा अभिभावक

घनश्यामदास बिड़ला

बहुत कम लोग जानते होंगे कि प्रसिद्ध उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला ने आजादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों और राष्ट्रीय कांग्रेस के मध्य एक सेतु का काम किया था।

गुन रहा है गांव

अपनी कविता के लिए सैनी एक खास दुनिया रचते हैं – राजा, रानी, राजकुमार, राजकुमारी और आम लोगों की दुनिया। इनके साथ जंगल, दरख्त, नदी और परिंदे भी हैं, जो जरुरत के मुताबिक कविता में जगह बनाते हैं।

कथा शुरू होती है

श्री आर. डी. सैनी की कविता शुद्ध भारतीय संस्कार की कविता है, उसमें अपने परिवेक्ष का रंग बहुत गहरा है। आज के काब्य में यह बात वुलंभ होती जा रही है। उनकी कविता को ‘कथा- कविता कहा जा सकता है, जो निश्चित ही एक मोलिक प्रयोग है। कथा में कविता और कविता में बहती कथा का अभिनव प्रयोग, कविता को जन-सामान्य तक सम्प्रेषित करने में सफल रहा है– प्रस्तुत संकलन की रचनाएं “कविता- पोस्टर’ प्रदनियों के माध्यम से भारत में चर्चा का विषय रही हैं। यह चर्चा यहाँ तक बढ़ी कि श्री आर. डी. सैनी को अब “कविता-पोस्टर’ के कवि के रूप में जाना जाता है।

किताब

राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.आर.डी.सैनी लगभग चोदह वर्ष तक राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक भी रह चुके हैं। जहां इनके निर्देशन में उच्चशिक्षा के हिंदी माध्यम के विधार्थीयों के लिए ञान-विञान की दो सौ से अधिक पुस्तकों का लेखन व प्रकाशन संम्भव हुआ। ये पुस्तकें हिंदी प्रदेशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में सन्दर्भ ग्रंथ के रूप में अनुशंसित हैं।

प्रिय ओलिव

यह कृति इस सवाल का जवाब देती है कि एक विद्यार्थी में सीखने , याद रखने और उससे सम्प्रेषित करने की क्षमता विकसित करने वाली शिक्षा किसी होनी चाहिए ?

प्रिय ओलिव

यह कृति इस सवाल का जवाब देती है कि एक विद्यार्थी में सीखने , याद रखने और उससे सम्प्रेषित करने की क्षमता विकसित करने वाली शिक्षा किसी होनी चाहिए ?

स्कूल बैंड

सन उन्नीस सौ इक्यावन में संतपुरिया बालिका विद्यापीठ, संतपुर के एन.सी.सी बैंड ने पहली बार दिल्ली की गणतंत्र दिवस की परेड में परफॉर्म किया था। इसके बाद साल-दर-साल उसका एक शानदार इतिहास बनता चला गया। किन्तु बासठ साल बाद, दौ हजार बारह में यह कहकर उसे परेड से बाहर कर दिया गया कि वह एक प्राइवेट स्कूल का बैंड है।

स्त्रीगंध

एक पुरुष जब अपनी पसंद की स्त्री को देखता है तो क्या उसकी गंध उसको खींचती,लुभाती और आत्मविभोर करती है और क्या यह सिर्फ सेक्स होता है या इससे आगे कुछ और भी है?